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Showing posts from January, 2018
नन्हे हाथो मैं जब देश की शान लेहरा रही थी देश भक्ति तब सबके  दिलो मैं उमड़ आयी थी मगर यह उमड़ना बस वहीँ तक सीमित रहा अगले ही पल जब उस नन्ही जान ने बचाओ बचाओ का नारा लगाया था तब किसी एक का भी कलेजा काँप न उठा सब देखते रहे जैसे कोइ तमाशा कोइ जाके रोक ले, ऐसा सहस भी किसीमे कहाँ रोती रही तड़पती रही दरिंदो से अपने जान की भीक मांगती रही चीख चीख कर आखिर उसने जान छोड़ दी हम बैठे अपने घरौंदो में परेड देखकर छाती फुलाने लगे कहने लगे देश क लिए कुछ करने की इच्छा रोज़ी - रोटी के लिए मारते रहे न जाने कितने ही गलियों में आज भी आज़ाद होने की चाह रखता हे कोइ देहलीज़ पार कर दुनिया बेझिझक देखना चाहता है कोइ यह कोइ शायद तुम्हारा सगा नहीं पर उसी माटी में  पलने वाला कोई भाई या बेहेन सही जिस देश के लिए कुछ करना चाहते हो उसकी बेटियों की हिफाज़त करलो शायद कहीं दिल के किसी कोने से आवाज़ आये की सिर्फ सरहद पे रहने वाले सैनिक नहीं.. अपनी बेटियों को, अपनी बहनो को सुरक्षित रखना भी किसी लड़ाई से, किसी संघर्ष से कम नहीं.. - Untold मीरा