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नन्हे हाथो मैं जब देश की शान लेहरा रही थी देश भक्ति तब सबके  दिलो मैं उमड़ आयी थी मगर यह उमड़ना बस वहीँ तक सीमित रहा अगले ही पल जब उस नन्ही जान ने बचाओ बचाओ का नारा लगाया था तब किसी एक का भी कलेजा काँप न उठा सब देखते रहे जैसे कोइ तमाशा कोइ जाके रोक ले, ऐसा सहस भी किसीमे कहाँ रोती रही तड़पती रही दरिंदो से अपने जान की भीक मांगती रही चीख चीख कर आखिर उसने जान छोड़ दी हम बैठे अपने घरौंदो में परेड देखकर छाती फुलाने लगे कहने लगे देश क लिए कुछ करने की इच्छा रोज़ी - रोटी के लिए मारते रहे न जाने कितने ही गलियों में आज भी आज़ाद होने की चाह रखता हे कोइ देहलीज़ पार कर दुनिया बेझिझक देखना चाहता है कोइ यह कोइ शायद तुम्हारा सगा नहीं पर उसी माटी में  पलने वाला कोई भाई या बेहेन सही जिस देश के लिए कुछ करना चाहते हो उसकी बेटियों की हिफाज़त करलो शायद कहीं दिल के किसी कोने से आवाज़ आये की सिर्फ सरहद पे रहने वाले सैनिक नहीं.. अपनी बेटियों को, अपनी बहनो को सुरक्षित रखना भी किसी लड़ाई से, किसी संघर्ष से कम नहीं.. - Untold मीरा